पंचकूला (ललित ):पार्ट-II एवं हारट्रोन के तहत विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की राज्यस्तरीय समिति एवं जागरूक कर्मचारियों द्वारा अपनी सेवाओं के नियमितिकरण की मांग को लेकर पंचकूला में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता की अध्यक्षता दिनेश शर्मा एवं विरेन्द्र ढांडा ने की। इस दौरान कर्मचारियों ने कहा कि वर्तमान समय में उनकी सेवाओं के नियमितिकरण में कोई कानूनी बाधा शेष नहीं है और सरकार को अब बिना किसी देरी के नियमितिकरण नीति लागू करनी चाहिए।प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कर्मचारी नेताओं ने बताया कि वर्ष 2014 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अनुबंधित कर्मचारियों के नियमितिकरण के लिए नीति बनाई थी, जिसके अंतर्गत बड़ी संख्या में कर्मचारियों की सेवाएं नियमित की गई थीं। हालांकि उस समय सरकार द्वारा बनाई गई तीन अलग-अलग नीतियों में से एक नीति को लेकर कानूनी विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके कारण मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तथा बाद में सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा।उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की मांग और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जुलाई 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में भाजपा सरकार ने नियमितिकरण नीति ड्राफ्ट-2018 तैयार किया था। लेकिन कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच पूर्ण सहमति नहीं बनने के कारण यह नीति लागू नहीं हो सकी। इसका खामियाजा पिछले लगभग आठ वर्षों से पार्ट-II एवं हारट्रोन के तहत कार्यरत हजारों कर्मचारी भुगत रहे हैं।कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अप्रैल 2026 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने मदन सिंह बनाम हरियाणा सरकार मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए वर्ष 2014 की श्रेणी ‘सी’ एवं ‘डी’ कर्मचारियों से संबंधित तीन वर्षीय नियमितिकरण नीति को कानूनी रूप से वैध ठहराया है। इस निर्णय के बाद अब पार्ट-II एवं हारट्रोन के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारी भी नियमितिकरण के कानूनी रूप से पात्र हो गए हैं।उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद अब सरकार के सामने केवल नियमितिकरण नीति ड्राफ्ट-2018 अथवा नई नियमितिकरण नीति-2026 लागू करने का कार्य शेष रह गया है। कर्मचारियों ने बताया कि वे पहले भी हरियाणा के मुख्यमंत्री को नियमितिकरण नीति-2026 तैयार करने संबंधी ज्ञापन सौंप चुके हैं।प्रेस वार्ता में घोषणा की गई कि आगामी मंगलवार एवं बुधवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित जनता दरबार में मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से पुनः ज्ञापन सौंपा जाएगा। कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि 31 जुलाई 2026 तक उनकी सेवाओं के नियमितिकरण पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए।कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा तक सरकार उनकी मांग पूरी नहीं करती है तो कानूनी रूप से नियमितिकरण के पात्र सभी कर्मचारी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पंचकूला में सरकार के खिलाफ लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि कर्मचारी वर्षों से धैर्यपूर्वक सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब और अधिक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी तथा वे अपने नियमितिकरण का अधिकार लेकर रहेंगे।






